राजनांदगांव, 11 अगस्त 2025
राजनांदगांव जिले के अछोली स्थित सुदर्शन पर्वत पर एक प्रतिमा को खंडित किए जाने की घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस घटना ने एक बार फिर रविंद्र रामटेके, जिलाध्यक्ष, अनुसूचित जाति मोर्चा, को सुर्खियों में ला दिया है। रामटेके ने इस कृत्य की घोर निंदा करते हुए इसे ‘विकृत मानसिकता का परिचय’ बताया है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनके तीखे तेवरों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
अखंडित प्रतिमा को खंडित करने पर रविंद्र रामटेके का कड़ा रुख:
रामटेके ने कहा कि इस तरह की घटनाओं के पीछे कुछ असामाजिक तत्व हैं जो अनुसूचित जाति के महापुरुषों और प्रतीकों का अपमान कर उनकी भावनाओं को भड़काना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक मूर्ति को तोड़ना नहीं, बल्कि पूरे समाज की आस्था पर हमला है।” रामटेके ने यह भी याद दिलाया कि कोरोना काल में जब समाज संकट में था, तब सुदर्शन समाज ने अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। उन्होंने कहा कि ऐसे में, अछोली के सुदर्शन पर्वत पर प्रतिमा को खंडित करना किसी भी अपराध से बढ़कर है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग:
रविंद्र रामटेके ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर ऐसी सजा दी जाए जो दूसरों के लिए एक सबक बने। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “हम इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे। जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, अनुसूचित जाति मोर्चा की लड़ाई जारी रहेगी। ” रामटेके के इस मजबूत और स्पष्ट रुख ने उन्हें समुदाय के एक प्रभावशाली नेता के रूप में दिखाया है, जो अपने समाज के हक के लिए हमेशा लड़ने वाले व्यक्ति के रूप में पहचाने जाते हैं।




