ग्राम पंचायतों द्वारा शहरों में छोड़े जा रहे मवेशी, शहरवासी परेशान

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सड़कों पर घूम रहे आवारा पशु बने खतरा, आए दिन हो रहीं दुर्घटनाएं, पंचायतो की मनमानी

डोंगरगाँव: शहर की शांत और व्यवस्थित जीवनशैली अब अव्यवस्था और खतरे की भेंट चढ़ती जा रही है। इसका कारण है – शहर में लगातार बढ़ती बेसहारा मवेशियों की संख्या। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आसपास की ग्राम पंचायतें अपने गांवों से मवेशियों को ट्रैक्टर और पिकअप वाहनों में भरकर शहर की सीमाओं के भीतर लाकर छोड़ रही हैं, जिससे न केवल यातायात व्यवस्था चरमरा गई है, बल्कि आमजन का जीवन भी खतरे में पड़ गया है।

शहर की सड़कों पर मवेशियों का कब्जा

इन दिनों शहर के मुख्य चौराहों, बाजारों, स्कूलों के आसपास और कॉलोनियों में दर्जनों की संख्या में गायें, बैल और बछड़े खुलेआम घूमते देखे जा सकते हैं। सबसे अधिक दिक्कत उन लोगों को होती है जिन्हें सुबह-शाम ऑफिस, स्कूल या अन्य जरूरी कामों के लिए निकलना होता है। मवेशियों के कारण सड़कों पर जाम लगना आम बात हो गई है।

कई बार मवेशी अचानक सड़क पर आ जाते हैं जिससे वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ जाता है और दुर्घटनाएं होती हैं। बीते एक सप्ताह में शहर में तीन अलग-अलग स्थानों पर मवेशियों के कारण सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें दो लोग घायल हुए और एक बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

रात में और भी बढ़ जाता है खतरा

रात के समय, जब रोशनी कम होती है, तो सड़कों पर बैठे या खड़े मवेशी नजर नहीं आते और यह खतरा और बढ़ जाता है। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्ग राहगीरों के लिए ये स्थिति जानलेवा बन रही है।

स्थानीय निवासी परेशान, सवालों के घेरे में पंचायतें

शहर के वार्ड नं. 7 के निवासी श्रीमती सरोज देवी बताती हैं, “हमारे मोहल्ले में हर सुबह 10-12 मवेशी दिखाई देते हैं। ये लोग गांव से ट्रैक्टर में भरकर यहां लाते हैं और शहर के बाहर छोड़ जाते हैं। मवेशी कचरा फैलाते हैं, गंदगी करते हैं और बच्चों को डराते हैं।”

कुछ अन्य लोगों ने बताया कि उन्होंने ग्राम पंचायत के ट्रैक्टरों को मवेशियों को उतारते हुए खुद देखा है। यह आरोप गंभीर हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

वहीं, कुछ पंचायत प्रतिनिधियों ने इस बात को स्वीकारा कि गांवों में चारा-पानी और गौशालाओं की समुचित व्यवस्था न होने के कारण वे मवेशियों को छोड़ने के लिए मजबूर हैं। एक सरपंच ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “गांवों में जो आवारा पशु हो जाते हैं, उन्हें रखने की कोई जगह नहीं है। सरकार योजनाएं बनाती है लेकिन ज़मीन और संसाधन नहीं देती। ऐसे में क्या करें?”

बीमारियों का भी बढ़ रहा खतरा

शहर में मवेशियों की वजह से सफाई व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कचरे के ढेर पर चरते हुए मवेशी प्लास्टिक और हानिकारक पदार्थ खा रहे हैं, जिससे उनकी सेहत खराब हो रही है और कई बार ये बीमार पशु संक्रमित भी होते हैं। इसके चलते संक्रमण फैलने का खतरा है,

क्या कहता है कानून?

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 289 के तहत यदि कोई व्यक्ति अपने पालतू जानवरों को लापरवाही से छोड़ता है और उससे किसी को हानि होती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, पशु क्रूरता अधिनियम के अंतर्गत भी ऐसे मामलों में मामला दर्ज हो सकता है।

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Author: Deepak Vaishnava

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