नांदगांव की गणेश उत्सव की विशिष्ट परंपरा पूरे देश में प्रसिद्ध : नीरज

Picture of Deepak Vaishnava

Deepak Vaishnava

FOLLOW US:

SHARE:

Spread the love
➡️ कहा – परंपरा की कड़ी में इस वर्ष सुरक्षा और शांति व्यवस्था पर विशेष ध्यान जरूरी

राजनांदगांव 30 अगस्त 2025 –

संस्कारधानी राजनांदगांव का गणेश उत्सव केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखता है। शहर कांग्रेस दक्षिण ब्लॉक के महामंत्री नीरज कन्नौजे ने कहा कि नांदगांव की गणेशोत्सव परंपरा स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही लोगों के बीच एकता, भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश देती आई है। यही कारण है कि यहां का गणेशोत्सव केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में जाना जाता है।उन्होंने कहा कि बदलते दौर में गणेश उत्सव अब हाईटेक रूप ले चुका है। भव्य पंडाल, आकर्षक झांकियां, रोशनी और तकनीक का उपयोग इसे और खास बनाता है, लेकिन इसी के साथ हमें इस परंपरा को किसी भी सूरत में कलंकित होने से बचाना होगा। कन्नौजे ने आम नागरिकों, गणेश उत्सव समितियों, मंडलों, पुलिस व सिविल प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का भी कर्तव्य है।

श्री कन्नौजे ने आगे कहा कि राजनांदगांव में गणेशोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण अनंत चौदस की रात को होने वाला भव्य गणेश विसर्जन जुलूस होता है। इस मौके पर शहर और गांवों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस परंपरा का हिस्सा बनता है। इतनी बड़ी भीड़ के बीच व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस, प्रशासन, सामाजिक संगठन और गणेशोत्सव समितियां पूरी ताकत से जुट जाती हैं। उन्होंने ने कहा कि थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। बिजली, पानी, सड़क, सफाई और कानून व्यवस्था जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर चूक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने नागरिकों और अधिकारियों से गुजारिश की कि इस उत्सव को सुरक्षित, सफल और सौहार्दपूर्ण बनाने के लिए सभी लोग मिलकर जिम्मेदारी निभाएं। अंत में उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी परंपरा, संस्कृति और एकता का प्रतीक है। इसे सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से मनाना ही हम सबकी असली आस्था और भक्ति का परिचायक है।

Deepak Vaishnava
Author: Deepak Vaishnava

.

Leave a Comment