
रायपुर: पूरे छत्तीसगढ़ में मितानिन कार्यकर्ताओं की अनिश्चितकालीन हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। अपनी मांगों को लेकर प्रदेश की हजारों मितानिनें राजधानी रायपुर में डटी हुई हैं, और इस राज्यव्यापी आंदोलन में राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव ब्लॉक की मितानिनों का प्रदर्शन भी बेहद मुखर है।डोंगरगांव की मितानिनें भी रायपुर में सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान कर रही हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से कम मानदेय पर काम कर रही हैं, और सरकार ने उन्हें हमेशा सिर्फ झूठे वादे दिए हैं। मितानिनों ने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी के दौरान जान जोखिम में डालकर काम करने के बाद भी सरकार ने उनके योगदान को नजरअंदाज किया।
मितानिनों की प्रमुख मांगें:
मानदेय में वृद्धि: मितानिनों की सबसे बड़ी मांग है कि उनके मानदेय को सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जाए।
सरकारी कर्मचारी का दर्जा: वे चाहती हैं कि उन्हें स्थायी सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, ताकि उन्हें पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, और अन्य सरकारी लाभ मिल सकें।
नियमितीकरण: उनकी मांग है कि उनकी सेवाओं को नियमित किया जाए, ताकि उनकी नौकरी स्थायी हो सके।
डोंगरगांव की मितानिनों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे अपनी हड़ताल वापस नहीं लेंगी। उनका कहना है कि अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे अपने आंदोलन को और भी उग्र बनाएंगी।




