राजनांदगांव: जाति प्रमाण पत्र संघर्ष मोर्चा एवं बौद्ध कल्याण समिति ने 2000 की कट-ऑफ तिथि हेतु सौंपा ज्ञापन

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राजनांदगांव जाति प्रमाण पत्र संघर्ष मोर्चा प्रतिनिधिमंडल संभागयुक्त को ज्ञापन देते हुए।
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राजनांदगांव जाति प्रमाण पत्र संघर्ष मोर्चा प्रतिनिधिमंडल संभागयुक्त को ज्ञापन देते हुए।
राजनांदगांव के पदाधिकारियों ने जाति प्रमाण पत्र नियमों में सुधार हेतु संभागयुक्त को ज्ञापन सौंपा।

राजनांदगांव/दुर्ग (1stkhabar24) : छत्तीसगढ़ राज्य के पुनर्गठन के उपरांत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र जारी करने में आ रही विसंगतियों को दूर करने के लिए राजनांदगांव के संगठनों ने आवाज बुलंद की है। इसी कड़ी में जाति प्रमाण पत्र संघर्ष मोर्चा एवं बौद्ध कल्याण समिति राजनांदगांव के प्रतिनिधिमंडल ने दिनांक 24/02/2026 को संभागयुक्त दुर्ग से मुलाकात कर एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल

​इस ज्ञापन को सौंपने के दौरान प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से रविन्द्र रामटेके, राजू बारमाटे, डॉ. के. एल. टांडेकर, डी. पी. लोनहरे, दीपक कोटांगले, एम. के. ऊके, अमर सिंह वासनिक, किशोर, पीयूष ऊके और नीलेश ठावरे उपस्थित रहे। इनके साथ ही बौद्ध कल्याण समिति राजनांदगांव एवं संघर्ष मोर्चा के अन्य प्रमुख पदाधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद थे।

शासकीय पत्रों और नियमों का दिया हवाला

​प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों के समर्थन में महत्वपूर्ण दस्तावेजों का संदर्भ दिया। ज्ञापन के माध्यम से निम्नलिखित पत्रों का हवाला दिया गया:

छत्तीसगढ़ शासन: सामान्य प्रशासन विभाग (नियम शाखा), मंत्रालय का पत्र क्रमांक GAD/5788/2025 नियम-3, नवा रायपुर अटल नगर, दिनांक 08/01/2026।

भारत सरकार: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का पत्र क्रमांक F-No.-1207/3/2024-SC, डॉ. आंबेडकर नगर, नई दिल्ली, दिनांक 10/06/2025।

2000 की कट-ऑफ तिथि की अनिवार्यता

​प्रतिनिधिमंडल ने अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ राज्य के संबंध में राष्ट्रपति द्वारा जारी अधिसूचना 01.11.2000 से प्रभावशील है। चूंकि नियमों के अनुसार छत्तीसगढ़ में SC/ST प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु संबंधित व्यक्ति का 01.11.2000 की स्थिति में राज्य का निवासी होना अनिवार्य है, इसलिए मोर्चा ने मांग की है कि इसी कट-ऑफ तिथि के आधार पर राज्य के सभी जिला दंडाधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएं। अतः प्रशासन से आग्रह किया गया है कि इस विसंगति को दूर कर आवेदकों को राहत प्रदान की जाए।

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Author: Deepak Vaishnava

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