राजनांदगांव | 23 अप्रैल 2026
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा को बचाने के लिए ‘ज्ञानभारतम मिशन’ शुरू किया गया है। वास्तव में, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्राचीन पाण्डुलिपियों, ताड़पत्रों और दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों को संरक्षित करना है। इसी क्रम में, राजनांदगांव जिले में भी जिला स्तरीय समिति का गठन कर व्यापक सर्वेक्षण कार्य शुरू कर दिया गया है।
जिले में मिली 3 अनमोल पाण्डुलिपियां
मिशन के तहत अब तक राजनांदगांव में 3 महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियां चिन्हित की गई हैं। इनका विवरण इस प्रकार है:
- प्रथम: दिग्विजय कॉलेज स्थित राधाकृष्ण मंदिर में संस्कृत श्लोकों वाली पाण्डुलिपि मिली है।
- द्वितीय: कॉलेज के ही प्राध्यापक डॉ. शैलेन्द्र सिंह के पास 1870-90 के दशक की धार्मिक एवं अवधी भाषा की हस्तलिखित पाण्डुलिपि प्राप्त हुई है।
- तृतीय: छुरिया विकासखंड के रतनभाट गांव में रहीम मियां के घर फारसी-उर्दू संदेशों वाला एक प्राचीन ताम्रपत्र मिला है।
कैसे होगा सर्वेक्षण?
सर्वेक्षण कार्य ‘ज्ञान भारतम’ मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक पंचायत सचिव को नोडल अधिकारी बनाया गया है। साथ ही, नागरिक स्व-प्रेरणा से भी ऐप के जरिए इसकी जानकारी दर्ज करा सकते हैं।
मास्टर ट्रेनर्स से करें संपर्क
यदि आपके पास कोई प्राचीन धरोहर है, तो आप जिला स्तर पर नियुक्त मास्टर ट्रेनर्स से संपर्क कर सकते हैं। सहायता हेतु संपर्क नंबर:
सुश्री प्रणीता शर्मा (8120758970), श्री केपी विश्वकर्मा (9827152229), श्री शतदल पात्रो (7879088180), श्रीमती कल्याणी सिन्हा (8103757894)।
“हमारी प्राचीन संस्कृति और ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखना हम सबका सामूहिक दायित्व है। आइए, इस मिशन में अपना सहयोग दें।”
अंततः, जिला प्रशासन ने सभी से अपील की है कि वे अपनी निजी या पारिवारिक संग्रह में उपलब्ध प्राचीन धरोहरों की जानकारी अवश्य दें। निश्चित रूप से, यह कदम भावी पीढ़ियों के लिए हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखेगा।
संपादक: दीपक वैष्णव




