राजनांदगांव: साइबर ठगी में म्यूल अकाउंट देने वाला रूपेन्द्र वर्मा गिरफ्तार, भेजा गया जेल

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राजनांदगांव  | 09 जून 2026

राजनांदगांव। बढ़ती साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए राजनांदगांव पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है. पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव के कड़े निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत सिटी कोतवाली पुलिस ने साइबर ठगी में प्रयुक्त होने वाले “म्यूल अकाउंट” (Mule Account) के एक शातिर खाताधारक को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए आरोपी ने मोटी कमीशन के लालच में साइबर अपराधियों को अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया था. आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है.

Rajnandgaon Police Arrested Cyber Fraud Mule Account Holder Rupendra Verma

फोटो: 1st Khabar 24 (कोतवाली पुलिस की कस्टडी में खड़ा गिरफ्तार आरोपी रूपेन्द्र कुमार वर्मा)

गृह मंत्रालय के ‘I4C पोर्टल’ के इनपुट पर पुलिस ने कसा शिकंजा

पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के “समन्वय पोर्टल” से राजनांदगांव पुलिस को कुछ संदिग्ध बैंक खातों का ब्योरा प्राप्त हुआ था. इन खातों का उपयोग देश भर में मासूम लोगों से ठगी गई रकम के लेन-देन, ट्रांसफर और संवर्धन के लिए किया जा रहा था.

गहन जांच में पता चला कि खाताधारकों को यह भली-भांति पता था कि उनके खातों में आने वाली रकम अवैध और धोखाधड़ी से अर्जित की गई है, इसके बावजूद कमीशन के चक्कर में इसका उपयोग जारी था. इस पर सिटी कोतवाली पुलिस ने **अपराध क्रमांक 279/2025** के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2), 317(4), 317(5), 111 एवं 3(5) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया था. मामले में पूर्व में एक आरोपी चुम्मन कुमार वर्मा को पहले ही जेल भेजा जा चुका है, जबकि अब दूसरे आरोपी रूपेन्द्र कुमार वर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया गया है.

👤 गिरफ्तार आरोपी का विवरण:
नाम: रूपेन्द्र कुमार वर्मा पिता मोहन लाल वर्मा (उम्र 25 वर्ष)
निवासी: ग्राम पलान्दुर, ओ.पी. मोहारा, थाना डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव (छ.ग.).

🚨 जानिए आखिर क्या होता है “म्यूल अकाउंट”?

“म्यूल अकाउंट” (किराए का खाता) एक ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी अवैध रूप से ठगी गई धनराशि को छुपाने, कानून से बचाने या निकालने के लिए करते हैं. अपराधी किसी सीधे-साधे या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को पैसों का लालच देकर, या धोखे से उसका बैंक खाता, एटीएम कार्ड और चेकबुक हासिल कर लेते हैं. इसके बाद ठगी का पैसा सीधे उसी खाते में मंगाया जाता है और जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए वहां से तुरंत कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है.

⚠️ साइबर फ्रॉड से बचने के लिए पुलिस के कड़े उपाय

• **पासबुक-सिम न दें:** किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक या मोबाइल सिम कार्ड कभी न दें.

• **लालच से बचें:** किसी भी प्रकार के ऑनलाइन कमीशन, लॉटरी या खाते में बड़ी रकम मंगाकर बदले में मिलने वाले पैसों के लालच में न आएं.

• **लेन-देन चेक करें:** अपने बैंक खातों के लेन-देन (स्टेटमेंट) की नियमित जांच करते रहें. किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत पुलिस या साइबर सेल को सूचित करें.

📢 राजनांदगांव पुलिस की जनहित में अपील:
साइबर अपराधी ऐसे किराए के खातों का उपयोग गेमिंग एप, सट्टेबाजी (गैंबलिंग), फर्जी ट्रेडिंग एप, सेक्सटॉर्शन और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी खतरनाक ठगी में करते हैं. अपना बैंक खाता किराए पर देना, कमीशन पर उपलब्ध कराना या बेचना एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती कानूनन अपराध है. ऐसा करने वाले खाताधारकों और दलालों के विरुद्ध पुलिस आगे भी देशद्रोह और जालसाजी की धाराओं के तहत कठोरतम कानूनी कार्रवाई करेगी.

🎙️ संपादक: दीपक वैष्णव  |  📝 फर्स्ट खबर 24 न्यूज़ डेस्क
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Author: Deepak Vaishnava

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