राजनांदगांव। डिजिटल लेन-देन के इस दौर में साइबर अपराधी अब मासूम लोगों को ठगने के साथ-साथ चॉइस सेंटरों को अपना मोहरा बना रहे हैं. राजनांदगांव पुलिस (मिश्रण साइबर सुरक्षा सेल) ने जिले के सभी चॉइस सेंटर (Choice Center) और ग्राहक सेवा केंद्रों (CSP) के संचालकों के लिए एक विशेष चेतावनी और एडवायजरी जारी की है. थोड़े से कमीशन के लालच या अनजाने में की गई लापरवाही के कारण चॉइस सेंटर संचालकों के बैंक खाते फ्रीज हो रहे हैं और उन्हें कड़े पुलिसिया व कानूनी मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है.

पोस्टर: राजनांदगांव पुलिस (साइबर ठगों के झांसे में आने से बचने के लिए जारी निर्देश)
जानिए कैसे होती है यह धोखाधड़ी? (Modus Operandi)
राजनांदगांव पुलिस द्वारा जारी अधिकारिक पोस्टर के अनुसार, साइबर अपराधी इस पूरी काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए 5 मुख्य चरणों का सहारा लेते हैं:
1. ठगी की रकम: साइबर ठग सबसे पहले किसी आम नागरिक को अपने झांसे में लेकर उससे मोटी रकम ऑनलाइन ठगते हैं.
2. झूठ बोलकर चॉइस सेंटर पहुंचना: ठगी का पैसा ट्रांसफर करने के लिए ठग सीधे चॉइस सेंटर पहुंचते हैं और संचालक से झूठ बोलते हैं कि उनके पास कहीं से ‘एक नंबर का वैध पैसा’ आ रहा है.
3. खाते का इस्तेमाल: ठग चॉइस सेंटर के बैंक अकाउंट या क्यूआर कोड (QR Code) में वह ठगी की राशि ट्रांसफर करवा लेते हैं और उसके बदले नगद (Cash) देने की मांग करते हैं.
4. कमीशन का लालच: थोड़े से कमीशन या एक्स्ट्रा चार्ज के लालच में आकर संचालक बिना किसी गहरी जांच-पड़ताल के अपने खाते में पैसा प्राप्त कर लेते हैं और ठग को तुरंत नगद कैश थमा देते हैं.
5. खाता फ्रीज और कार्रवाई: जब मुख्य पीड़ित व्यक्ति साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराता है, तो पुलिस मनी ट्रेल (पैसे के रूट) का पीछा करते हुए चॉइस सेंटर के खाते तक पहुंच जाती है. चूंकि ठगी का पैसा उस खाते में आया होता है, इसलिए बैंक अकाउंट को तुरंत होल्ड या फ्रीज कर दिया जाता है.
⚠️ याद रखें: ठगी की रकम को अपने खाते में प्राप्त करना भी एक गंभीर कानूनी अपराध है. भले ही आप अनजाने में ऐसा कर रहे हों, फिर भी आप कानूनी कार्रवाई और पुलिसिया रिमांड के दायरे में आ जाएंगे.
चॉइस सेंटर संचालक क्या करें और क्या न करें?
✅ क्या करें? (Do’s)
• पहचान पत्र अनिवार्य: हमेशा अपने सेंटर पर पैसे का लेन-देन करने वाले ग्राहक की पूरी पहचान और वैध दस्तावेज ([ID Proof Redacted] या पैन कार्ड) की कॉपी अवश्य लें.
• स्रोत की जानकारी: पैसा प्राप्त करने का असली कारण और उसका सही स्रोत (Source) स्पष्ट रूप से जानें और उसका रिकॉर्ड रजिस्टर में मेंटेन करें.
• संदेह होने पर इनकार: यदि कोई भी लेन-देन जरा भी संदिग्ध या असामान्य लगे, तो तुरंत साफ मना करें और उसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को दें.
• KYC नियमों का पालन: बैंकों की ओर से तय किए गए कड़े KYC और लेन-देन के नियमों का पूरी सख्ती से पालन करें.
• तत्काल रिपोर्ट: किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत अपने संबंधित बैंक और नजदीकी साइबर थाना को दें.
❌ क्या न करें? (Don’ts)
• किसी भी अज्ञात, नए या संदिग्ध व्यक्ति की राशि अपने निजी या व्यावसायिक बैंक खाते में भूलकर भी प्राप्त न करें.
• बिना पुख्ता पहचान और दस्तावेज के किसी भी व्यक्ति को अपने पास से नगद भुगतान (Cash Payment) बिल्कुल न करें.
• थोड़े से एक्स्ट्रा कमीशन के लालच में आकर अपना बैंक खाता या क्यूआर कोड किसी अन्य के उपयोग के लिए न सौंपें.
• किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर UPI, बैंक ट्रांसफर या नगद लेन-देन का माध्यम (माध्यम कली) न बनें.
आपकी एक छोटी सी गलती, बिगाड़ सकती है प्रतिष्ठा:
पुलिस प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही से न सिर्फ आपका बैंक खाता हमेशा के लिए ब्लॉक हो सकता है, बल्कि समाज में आपकी व्यावसायिक प्रतिष्ठा पूरी तरह खराब हो सकती है और आपको जेल की हवा तक खानी पड़ सकती है. सजग रहें, सुरक्षित रहें.
📞 संदिग्ध लेन-देन की तुरंत यहाँ रिपोर्ट करें:
• राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930
• आधिकारिक राष्ट्रीय पोर्टल: www.cybercrime.gov.in
• सोशल मीडिया अपडेट्स: राजनांदगांव पुलिस के आधिकारिक हैंडल्स
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