राजनांदगांव, [23-06-2025]: राजनांदगांव जिले में श्रम कार्ड पंजीयन से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर और सुनियोजित फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने श्रम विभाग की कार्यप्रणाली और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालकों की भूमिका पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में न केवल श्रमिक के दस्तावेजों (आधार कार्ड) का दुरुपयोग किया गया है, बल्कि उनके नाम पर दो अलग-अलग जिलों में दो श्रम कार्ड भी जारी कर दिए गए हैं। यह पूरा घटनाक्रम श्रम निरीक्षक नारद सिंह मंडावी और CSC सेंटर संचालक कमलेश कुमार साहू की सीधी संलिप्तता की ओर स्पष्ट संकेत कर रहा है, जिस पर तत्काल उच्च स्तरीय जाँच और कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।
मामले का विस्तृत विवरण:
ग्राम पाण्डुका निवासी श्रमिक गोविंद दास साहू ने अपने पुराने असंगठित कर्मकार पंजीयन (क्रमांक: 427392730) को रद्द करवाकर भवन कर्मकार पंजीयन करवाने का मन बनाया था। इस हेतु उन्होंने आतरगांव स्थित CSC सेंटर के संचालक कमलेश साहू को अपना आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और पूर्व पंजीकृत असंगठित कर्मकार कार्ड उपलब्ध कराया। श्रमिक का स्पष्ट उद्देश्य एक वैध भवन कर्मकार कार्ड प्राप्त करना था।
आरोप और धोखाधड़ी का स्वरूप:
- आधार कार्ड से छेड़छाड़: CSC संचालक ने श्रमिक के आधार कार्ड नंबर के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ की।
- पंजीयन का हेरफेर: श्रमिक के पूर्व असंगठित कर्मकार पंजीयन (क्रमांक: 427392730) को संशोधित कर दुर्ग जिले में स्थानांतरित कर दिया गया।
- द्वैध पंजीयन: इसी दौरान, राजनांदगांव जिले में गोविंद दास साहू के मूल आधार कार्ड का उपयोग कर एक बिलकुल नया भवन निर्माण कर्मकार कार्ड (क्रमांक: 421812819) भी बनवा दिया गया। इस प्रकार, एक ही श्रमिक के नाम पर दो अलग-अलग जिलों में दो सक्रिय श्रम कार्ड मौजूद हैं, जो कि सरकारी नियमों का स्पष्ट उल्लंघन और एक बड़ा फर्जीवाड़ा है।
संदेहास्पद समय-सीमा: मिलीभगत की पुष्टि:
इस पूरे फर्जीवाड़े को जिस गति से अंजाम दिया गया, वह श्रम विभाग के कार्यालय की संदेहास्पद मिलीभगत के बिना संभव नहीं है:
- 25 मार्च 2025: असंगठित कर्मकार पंजीयन में संशोधन के लिए आवेदन किया गया।
- 28 मार्च 2025: मात्र तीन दिनों के भीतर यह संशोधन पूरा हो गया।
- 30 मार्च 2025: इसके तुरंत बाद, नया भवन कर्मकार कार्ड भी जारी हो गया।
श्रम विभाग की जटिल प्रक्रियाओं को देखते हुए, इतनी कम अवधि (मात्र 5 दिनों) में दो अलग-अलग जिलों में इस प्रकार का कार्य होना बिना अंदरूनी सहयोग के असंभव प्रतीत होता है।
संलिप्तता और कार्रवाई की मांग:
इस घटना ने CSC सेंटरों की जवाबदेही और श्रम विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- CSC संचालक कमलेश कुमार साहू: उन पर श्रमिक के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने, अवैध वसूली करने और सुनियोजित फर्जीवाड़े में लिप्त होने का स्पष्ट आरोप है। उनके CSC लाइसेंस को तत्काल रद्द कर उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

- श्रम निरीक्षक नारद सिंह मांडवी: भवन निर्माण श्रमिक कार्ड (क्रमांक: 421812819) जारी करने में उनकी सीधी भूमिका होने के कारण, उनकी संलिप्तता अत्यधिक संदिग्ध है। उनके खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की तत्काल अनुशंसा की जाती है।

- श्रम विभाग के अन्य अधिकारी: इस पूरी प्रक्रिया में शामिल अन्य श्रम विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी गहन जांच की जानी चाहिए, जिनकी मिलीभगत के बिना यह फर्जीवाड़ा संभव नहीं हो सकता था।
यह मामला केवल एक श्रमिक के साथ हुई धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता और मेहनतकश श्रमिकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अतः, हम संबंधित उच्च अधिकारियों (जैसे श्रम आयुक्त, जिला कलेक्टर) से मांग करते हैं कि इस पूरे प्रकरण की तत्काल और उच्च स्तरीय जांच की जाए, ताकि सभी दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए श्रम विभाग की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इस गंभीर फर्जीवाड़े के अन्य पहलुओं का भी जल्द खुलासा किया जाएगा।




