➡️ छठ पर्व मनुष्य और प्रकृति के बीच अटूट संबंध की जीवंत मिसाल सूर्य की उपासना से मिलता है जीवन में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा

राजनांदगांव
नगर निगम के वरिष्ठ भाजपा पार्षद शिव वर्मा ने कहा कि छठ पर्व भारतीय संस्कृति और आस्था का अद्भुत संगम है जो सूर्य देव की उपासना, परिवार की खुशहाली, संतान की दीर्घायु और प्राकृतिक तत्वों के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि मानव और प्रकृति के सहअस्तित्व का सबसे पवित्र संदेश भी देता है।
श्री वर्मा ने आगे कहा कि छठ पूजा में श्रद्धालु उदयमान और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह परंपरा सूर्य देव की अपार शक्ति, प्रकाश और जीवनदायिनी ऊर्जा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छठी मैया जिन्हें सूर्य देव की बहन माना जाता है से भक्त अपने बच्चों की रक्षा, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं। छठ पर्व का प्रत्येक नियम और परंपरा संयम, शुद्धता और आत्मनियंत्रण का संदेश देता है। व्रतीजन बिना नमक का सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं और पूरी श्रद्धा से उपवास रखते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह शारीरिक और मानसिक शुद्धि का माध्यम भी है। छठ व्रत व्यक्ति में अनुशासन, धैर्य और निष्ठा की भावना जागृत करता है।आज के बदलते समय में जब लोग प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं, तब छठ जैसे पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। इसमें नदियों, तालाबों और सूर्य की आराधना के माध्यम से पर्यावरण के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। यह त्योहार लोक संस्कृति और पारिवारिक एकता को सशक्त बनाता है। छठ पर्व में सामाजिक एकता और सहयोग की भावना भी झलकती है। लोग मिल-जुलकर घाटों की सफाई करते हैं, व्रतीजनों की सहायता करते हैं और सामूहिक श्रद्धा का वातावरण निर्मित करते हैं। यह त्योहार समाज में भाईचारे, प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है। छठ पर्व हमें यह सिखाता है कि जब तक हम प्रकृति और समाज के साथ संतुलन में रहेंगे, तब तक हमारा जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भरपूर रहेगा। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि इस छठ पर्व पर पर्यावरण की स्वच्छता बनाए रखें, प्लास्टिक का उपयोग न करें और श्रद्धा, शुद्धता एवं प्रेम के साथ सूर्य देव की उपासना करें।



