
राजनांदगांव। जिले में बच्चों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालने के लिए प्रशासन द्वारा ‘पोट्ठ लईका पहल’ अभियान को गति दी जा रही है। इसी क्रम में आंगनबाड़ी केंद्रों में जहां ‘पालक चौपाल’ के जरिए माता-पिता को जागरूक किया जा रहा है, वहीं विभाग के अधिकारी अब गंभीर कुपोषित बच्चों के घरों तक पहुँचकर सीधे परिजनों को सुपोषण का मंत्र दे रहे हैं।
सिंघोला में गृह भेंट: स्वास्थ्य और खान-पान पर जोर
राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम सिंघोला में महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर ने गंभीर कुपोषित बच्चों के घरों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य की बारीकी से जानकारी ली और परिजनों को शिशु के टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और साफ-सफाई के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया।
क्या है ‘तिरंगा भोजन’? जिससे दूर होगा कुपोषण
सुपरवाइजर ने परिजनों को बच्चों के बेहतर विकास के लिए ‘तिरंगा भोजन’ की अवधारणा समझाई। इसके तहत भोजन की थाली में तीन रंगों के पोषक तत्वों का होना अनिवार्य बताया गया:
केसरिया रंग: प्रोटीन के लिए दालें, सोयाबीन और अंडा।
सफेद रंग: कार्बोहाइड्रेट के लिए चावल और रोटी।
हरा रंग: विटामिन और मिनरल्स के लिए हरी सब्जियां जैसे पालक, मेथी और मुनगा भाजी।
परिजनों को दी गई खास सलाह
अभिभावकों को प्रेरित किया गया कि वे अपने बच्चों को दिन में कम से कम तीन बार पौष्टिक आहार दें और स्वयं भी दिन में 2-3 बार संतुलित भोजन लें। अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों को प्रोटीन, विटामिन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर भोजन उपलब्ध कराकर उन्हें जल्द से जल्द सुपोषण की श्रेणी में लाना है।
अभियान की प्राथमिकता: शिशुवती माताओं और नन्हे बच्चों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करना और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध साग-भाजियों के माध्यम से पोषण स्तर में सुधार लाना विभाग की प्राथमिकता है।


