➡️ चिकित्सक भगवान का रूप होते हैं इस उक्ति को चरितार्थ कर रहे डॉ. साहू

राजनांदगांव
चिकित्सक भगवान का रूप होते हैं इस कहावत को सच कर दिखाया है स्वास्थ्य विभाग राजनांदगांव के नेत्र सहायक अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार साहू ने जो ग्रामीण अंचलों में बच्चों की आंखों की रोशनी लौटाने और मन जीतने के लिए चॉकलेट वाले डॉक्टर के नाम से मशहूर हैं।
कलेक्टर जितेंद्र यादव और सीएमएचओ डॉ. नेतराम नवरत्न के निर्देशानुसार जिलेभर में शालेय नेत्र स्वास्थ्य परीक्षण चलाया जा रहा है। इसी अभियान के दौरान विकासखंड छुरिया में सभी मिडिल स्कूलों के लगभग 10000 बच्चों की आंखों की जांच का लक्ष्य तय किया गया था जिसकी बड़ी जिम्मेदारी डॉ. साहू को दी गई।21 मिडिल स्कूलों के लगभग 2000 बच्चों का जाँच का लक्ष्य।
12 साल की बच्ची दोनों आंखों से लगभग अंधी जाँच में सामने आया चौंकाने वाला मामला
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अलीवारा की 12 वर्षीय कशिश कक्षा 7वीं जब ब्लॉक टीम के सामने जांच के लिए आई तो पता चला कि वह बायीं आंख से 1 मीटर तक दायीं आंख से 2 मीटर तक उंगली भी साफ नहीं देख पा रही थी। पूरी जांच के बाद स्पष्ट हुआ कि कशिश की दोनों आंखों में गंभीर मोतियाबिंद है। परिजन घबराए हुए थे कहते थे कि बहुत इलाज करा चुके अब कुछ संभव नहीं।
ज्ञान और विश्वास ने बदली तस्वीर डॉ. साहू ने खुद आगे बढ़कर संभाली कमान
गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ. मुकेश साहू ने स्वयं पूरा बीड़ा उठा लिया।
उन्होंने परिजनों को समझाया कि अब तक उचित इलाज नहीं मिल पाया था सरकारी अस्पताल में पूरी तरह मुफ्त उपचार उपलब्ध है बच्ची बिल्कुल सामान्य रूप से देख सकेगी लंबे विश्वास-निर्माण के बाद परिवार ऑपरेशन के लिए तैयार हुआ। इस अभियान में डॉ. दिग्विजय शर्मा, डॉ. मनीषा बैस, आयुष्मान आरोग्य मंदिर जयसिंगटोला एवं स्कूल स्टाफ का विशेष सहयोग रहा।
मेडिकल कॉलेज पेंड्री में सफल ऑपरेशन कशिश फिर से देख सकी दुनिया
3 दिसंबर को कशिश की जांच मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव में हुई और 4 दिसंबर को उसे भर्ती किया गया। 5 दिसंबर को दायीं आंख का मोतियाबिंद ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। 8 दिसंबर को बच्ची सकुशल घर लौटी। परिवार और गांव के लोग खुशी से भावुक हो उठे क्योंकि जिस रोशनी को वे खो चुका मान बैठे थे, वह वापस लौट आई।
चॉकलेट वाले डॉक्टर’ की चमक लगातार बढ़ रही सेवा और सादगी ने बनाया खास
डॉ. मुकेश साहू की पहचान अब सिर्फ एक नेत्र सहायक अधिकारी की नहीं रही। वे लोंगो को चॉकलेट खिलाकर डर दूर करते हैं हर मरीज को सम्मान और मुस्कान देते हैं पिछले तीन वर्षों में कई स्कूली बच्चों के मोतियाबिंद ऑपरेशन करा चुके हैं जिले के नंबर वन नेत्र सहायक अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं दूरस्थ वनांचल में सबसे लोकप्रिय चिकित्सा कर्मियों में शामिल हैं इस बार जो बच्ची ऑपरेशन के लिए तैयार हुई, वह उनके कार्यक्षेत्र में भी नहीं आती थी, फिर भी जिम्मेदारी उठाना उनके समर्पण की मिसाल है।
सेवा ही श्रेष्ठ धर्म डॉ. मुकेश साहू ने किया सिद्ध
जिलेभर में उनकी सेवाभाव, समर्पण और बच्चों के प्रति प्रेम ने उन्हें स्वास्थ्य विभाग का असली हीरा बना दिया है। गांव-गांव में लोग कहते सुने जाते हैं जहां पहुँचते हैं चॉकलेट वाले डॉक्टर, वहाँ लौट आती है रोशनी।




