
डोंगरगढ़: मां बम्लेश्वरी के दरबार में आदिवासी समाज की ‘पंचमी भेंट’, दशकों पुरानी परंपरा का हुआ अनूठा संगम
डोंगरगढ़ | 24 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ की आराध्य देवी मां बम्लेश्वरी के दरबार में चैत्र नवरात्रि के दौरान भक्ति का अनूठा स्वरूप देखने को मिल रहा है। दशकों पुरानी परंपरा को निभाते हुए आदिवासी समाज के भाई-बंधुओं ने पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ पंचमी भेंट की पूजा संपन्न की। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति के दर्शन भी कराता है।

मां बम्लेश्वरी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब
हर साल निभाई जाती है यह गौरवशाली परंपरा
मान्यता और इतिहास के अनुसार, आदिवासी समाज हर साल नवरात्रि की पंचमी तिथि पर विशेष रूप से माता के दरबार में हाजिरी लगाता है। अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों और गीतों के साथ जब आदिवासी समूह मंदिर पहुंचता है, तो पूरा डोंगरगढ़ धाम उनकी संस्कृति के रंग में रंग जाता है। समाज के प्रमुखों द्वारा माता को विशेष भेंट अर्पित कर क्षेत्र की खुशहाली और अच्छी फसल की कामना की गई।

राजनांदगांव पुलिस की चाक-चौबंद व्यवस्था
लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति और इस विशेष पूजा के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए राजनांदगांव पुलिस पूरी तरह मुस्तैद दिखी। सुरक्षित और सुव्यवस्थित पूजा-अर्चना सुनिश्चित करने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

मां बम्लेश्वरी की ऊंची पहाड़ियों पर आधुनिकता और प्राचीन परंपराओं का यह मेल देखने लायक था। एक ओर जहां डिजिटल दौर के श्रद्धालु माता के दर्शन कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर अपनी जड़ों से जुड़े आदिवासी समाज की ‘पंचमी भेंट’ ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
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Author: Deepak Vaishnava
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