राजनांदगांव : अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने प्रशासन सख्त, 2 साल की सजा का प्रावधान

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📢 बाल विवाह मुक्त अभियान: जिला प्रशासन राजनांदगांव

राजनांदगांव | 19 अप्रैल 2026

अक्षय तृतीया के अवसर पर अक्सर बाल विवाह की घटनाएं सामने आती हैं, जिसे रोकने के लिए राजनांदगांव जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। वास्तव में, ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ अभियान के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक निगरानी एवं जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत, प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि कम उम्र में विवाह कराने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी प्रावधान और सजा का प्रावधान

जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास श्रीमती गुरप्रीत कौर ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत कड़े प्रावधान हैं। निश्चित रूप से, बाल विवाह कराने, उसमें शामिल होने या किसी भी प्रकार का सहयोग करने (जैसे टेंट, बैण्ड, अनुष्ठान) वाले व्यक्तियों के विरूद्ध 2 वर्ष तक की सजा एवं 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वास्तव में, यह कानून बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है।

🛑 यहाँ दें बाल विवाह की सूचना:

  • 📞 चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
  • 📞 महिला हेल्पलाइन: 181
  • 📞 आपातकालीन नंबर: 112

सूचना देने वाले की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।

प्रशासन का पिछले वर्ष का रिकॉर्ड और सक्रियता

वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में बाल विवाह की 4 सूचनाएं प्राप्त हुई थीं, जिन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने सभी को सफलतापूर्वक रोक दिया। इसके परिणाम स्वरूप, जिले में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के रूप में ग्राम पंचायत सचिवों, पर्यवेक्षकों और परियोजना अधिकारियों को तैनात किया गया है। अंततः, जिला प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षकों से अपील की है कि वे समाज को बाल विवाह मुक्त बनाने में अपना पूर्ण सहयोग दें।

“शिक्षा ही बच्चों का भविष्य है, उन्हें कम उम्र में विवाह के बंधन में न बांधें; बाल विवाह एक सामाजिक अपराध है।”

18 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं और 21 वर्ष से कम आयु के बालकों के विवाह पर रोक लगाना सामाजिक जिम्मेदारी है। वास्तव में, प्रशासन अब हर सूचना पर नजर रखे हुए है ताकि भविष्य प्रभावित न हो। निश्चित रूप से, जागरूक नागरिक बनकर ही हम इस कुप्रथा को जड़ से खत्म कर सकते हैं।

संपादक: दीपक वैष्णव

Deepak Vaishnava
Author: Deepak Vaishnava

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