राजनांदगांव | 20 अप्रैल 2026
राजनांदगांव जिले में ग्रामीण आजीविका को नई दिशा देने के लिए रेशम उत्पादन एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। वास्तव में, कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने आज ग्राम गठुला में 10 हेक्टेयर में संचालित टसर परिवर्तन केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने उत्पादन गतिविधियों का जायजा लिया और रेशम उत्पादन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग को तुरंत तार फेंसिंग का एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए।
स्व-सहायता समूहों के लिए आय का बड़ा जरिया
गठुला केंद्र में अर्जुन पौधों के रोपण के जरिए रेशम कीट पालन किया जा रहा है, जिससे स्व-सहायता समूहों की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। इसके अंतर्गत, महिलाएं कीट पालन, खाद प्रबंधन और कोसा उत्पादन जैसे कार्य करती हैं। निश्चित रूप से, यह केंद्र ग्रामीणों के लिए आर्थिक मजबूती का केंद्र बना है, जहाँ महिलाओं ने वर्ष 2025-26 में लगभग 6 लाख रुपये (5,95,320 रुपये) की कुल आय अर्जित की है।
टसर केंद्र का निरीक्षण करते कलेक्टर जितेन्द्र यादव
उत्पादन प्रक्रिया: साल में 2 से 3 फसलें, जून से जनवरी तक कीट पालन का कार्य।
विशेषता: दुर्ग संभाग का एकमात्र ककून बैंक यहाँ संचालित है, जहाँ कोसा का ग्रेडिंग अनुसार उचित मूल्य मिलता है।
शैक्षणिक महत्व: कृषि महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए अध्ययन का प्रमुख केंद्र।
तकनीकी प्रशिक्षण से बढ़ाएंगे उत्पादन
कलेक्टर ने विभाग को निर्देश दिए कि ग्रामीणों को और अधिक तकनीकी मार्गदर्शन व संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। वास्तव में, बेहतर प्रशिक्षण से किसान अपनी फसल की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं। अंततः, कोसा बैंक के माध्यम से ग्रेडिंग आधारित खरीदी होने से महिलाओं को अब बिचौलियों के बजाय सीधा उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर श्री अनिकेत साहू और रेशम विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
“रेशम उत्पादन ग्रामीण आजीविका का एक सशक्त माध्यम है; तकनीकी प्रशिक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग से महिलाओं की आय को और बढ़ाया जाएगा।”
केंद्र में कीट पालन और ककून बैंक के सफल संचालन से यह क्षेत्र रेशम उत्पादन का बड़ा हब बन रहा है। निश्चित रूप से, प्रशासन की यह दूरदर्शी सोच ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
संपादक: दीपक वैष्णव

