बिलासपुर/सरायपाली | 03 मई 2026
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के चर्चित सरायपाली हत्याकांड में आखिरकार पीड़ित परिवार की कानूनी जीत हुई है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग (JJF) के प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय सी.एस. चौहान की प्रभावी पैरवी के बाद, माननीय उच्च न्यायालय ने शासन को कड़ा निर्देश जारी किया है।
⚖️ न्यायालय का फैसला:
माननीय उच्च न्यायालय ने महासमुंद कलेक्टर को निर्देशित किया है कि पीड़ित परिवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत ₹8,25,000 की मुआवजा राशि का तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
🚩 न्याय की आस में दर-दर भटक रहा था परिवार
विदित हो कि 1 जुलाई 2022 को सरायपाली के महलपारा निवासी दुष्यंत चौहान की जघन्य हत्या कर दी गई थी। मृतक अनुसूचित जाति वर्ग से था, जिसके कारण नियमानुसार परिवार सहायता राशि का पात्र था। पीड़ित पिता धरम सिंह चौहान ने जिला प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगाई थी, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के चलते उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा था।
💼 वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. चौहान ने संभाली कमान
जब जिला प्रशासन से कोई राहत नहीं मिली, तब मानवाधिकार आयोग (JJF) के प्रदेश अध्यक्ष सी.एस. चौहान ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष मजबूती से पक्ष रखते हुए बताया कि किस प्रकार नियमों के बावजूद पीड़ित परिवार को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उनकी प्रभावी दलीलों के बाद कोर्ट ने अब भुगतान में विलंब न करने का सख्त निर्देश दिया है।
खबर के मुख्य अंश:
- मामला: दुष्यंत चौहान हत्याकांड (2022)।
- अधिवक्ता: सी.एस. चौहान (वरिष्ठ अधिवक्ता एवं प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग-JJF)।
- अधिकार: SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मिली बड़ी राहत।
संपादकीय टिप्पणी: वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. चौहान के प्रयासों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि कानून और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो न्याय जरूर मिलता है।
संपादक: दीपक वैष्णव | 1st Khabar 24




