राजनांदगांव | 11 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ शासन की ‘अस्पृश्यता निवारणार्थ अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना’ समाज में समानता लाने की दिशा में एक सशक्त माध्यम बन गई है। वास्तव में, यह योजना अस्पृश्यता उन्मूलन और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी साबित हो रही है। इस योजना के तहत गैर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जाति के मध्य होने वाले विवाह को सम्मानित किया जाता है। इसके अंतर्गत, पात्र दंपत्तियों को 2 लाख 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि और प्रशंसा पत्र प्रदान किया जाता है।
तीन वर्षों में 151 दंपत्तियों को मिली सहायता
अपर कलेक्टर एवं जिला विवाह अधिकारी श्री सीएल मारकण्डेय ने योजना की प्रगति के विस्तृत आंकड़े साझा किए हैं। इसके परिणाम स्वरूप, राजनांदगांव जिले में पिछले तीन वर्षों में कुल 151 दंपत्तियों को 3 करोड़ 77 लाख 50 हजार रुपए का भुगतान किया जा चुका है। निश्चित रूप से, यह राशि दंपत्तियों को नए जीवन की शुरुआत में बड़ी आर्थिक मजबूती प्रदान कर रही है।
📉 वर्षवार सहायता का विवरण:
- ✅ 2023-24: 59 हितग्राहियों को ₹1,47,50,000
- ✅ 2024-25: 54 हितग्राहियों को ₹1,35,00,000
- ✅ 2025-26: 38 हितग्राहियों को ₹95,00,000
पात्रता की शर्तें और आवेदन की प्रक्रिया
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इसके अलावा, विवाह का पंजीयन ‘हिन्दू विवाह अधिनियम 1955’ के तहत होना आवश्यक है। आवेदन विवाह की तिथि से एक वर्ष के भीतर प्रस्तुत करना होता है। वास्तव में, द्वितीय विवाह की स्थिति में लाभ देय नहीं होता है, लेकिन विधवा पुनर्विवाह के मामलों में निर्धारित शर्तों के अनुसार पात्रता मान्य है।
“कलेक्टर इस योजना के सक्षम प्राधिकारी हैं, जो जिला स्तरीय समिति की जांच के बाद राशि स्वीकृत करते हैं।”
यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि आपसी सम्मान और सामाजिक एकता को भी मजबूत कर रही है। अंततः, जिला प्रशासन द्वारा इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन समाज की रूढ़ियों को तोड़ने में सफल हो रहा है। इसलिए, राजनांदगांव जिले में सामाजिक परिवर्तन की यह लहर स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
संपादक: दीपक वैष्णव


