अधिवक्ता सी. एस. चौहान की अगुवाई में पीड़ितों को मिला न्याय, हाईकोर्ट ने जमीन नामांतरण का आदेश दिया

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जशपुर (छत्तीसगढ़): जशपुर में एक जमीन नामांतरण का मामला 8 साल से अटका हुआ था, जिसमें अब पीड़ितों को न्याय मिला है। अधिवक्ता चंद्रसेन चौहान की प्रभावी पैरवी के बाद, हाईकोर्ट ने प्रशासन को 15 दिनों के भीतर जमीन का नामांतरण और अभिलेख दुरुस्त करने का कड़ा आदेश दिया है। इस जीत पर छत्तीसगढ़ मानव अधिकार संगठन JJF ने भी पीड़ितों को बधाई दी है।

क्या था मामला?

यह मामला 2017 का है। पीड़ितों ने कानूनी तौर पर रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए एक जमीन खरीदी थी। इसके बाद उन्होंने जमीन का नामांतरण करवाने के लिए कुनकुरी के तहसील न्यायालय में आवेदन किया। कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए हल्का पटवारी को अभिलेख ठीक करने का निर्देश दिया।

मगर, पटवारी ने इस आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद, पीड़ितों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और अपर कलेक्टर, जशपुर से भी गुहार लगाई। दोनों अधिकारियों ने भी पटवारी को नामांतरण प्रक्रिया पूरी करने के लिए आदेश दिया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। पीड़ित 8 साल तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहे।

हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

सरकारी व्यवस्था से परेशान होकर, पीड़ितों ने आखिरकार अधिवक्ता चंद्रसेन चौहान के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका (प्रकरण क्रमांक WPC/4975/2025) दायर की। पहली ही सुनवाई में, जस्टिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को कड़ी फटकार लगाई और पटवारी के रवैये पर नाराजगी जताई।

कोर्ट का गुस्सा इतना था कि जस्टिस ने कहा, “क्या पटवारी इतना बड़ा अधिकारी हो गया है कि वह अपने से वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश का भी पालन नहीं कर रहा है? इसे कल 11 बजे हथकड़ी लगाकर कोर्ट में पेश किया जाए!”

इसके बाद, सरकार की ओर से वकील ने कोर्ट से माफी मांगी। कोर्ट ने अंतिम चेतावनी देते हुए 15 दिनों के अंदर नामांतरण और अभिलेख दुरुस्त करने का आदेश दिया।

इस फैसले के बाद, पीड़ितों ने राहत की सांस ली है। इस मामले में लगातार सहयोग और मार्गदर्शन देने वाले छत्तीसगढ़ मानव अधिकार संगठन JJF ने भी इस जीत पर पीड़ितों और उनके अधिवक्ता को बधाई दी है। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि न्याय के लिए लड़ने से जीत जरूर मिलती है।

 

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Author: Deepak Vaishnava

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