➡️तहसीलदार दे रहे तारीख पर तारीख, समयाभाव बताकर टाल रहे कार्यवाही; क्या राजनीतिक दबाव में है मामला?
डोंगरगांव। शहर के करियाटोला में इन दिनों शासकीय जमीन पर अवैध निर्माण का गोरखधंधा धड़ल्ले से चल रहा है, जिसने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। हैरत की बात यह है कि एक ओर जहां नियम-कानूनों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर तहसीलदार लगातार ‘समय का अभाव’ बताकर कार्यवाही को टाल रहे हैं और महज तारीख पर तारीख दिए जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों में रोष है और वे सीधे तौर पर राजनीतिक संरक्षण और अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं।
नियमों की खुली अवहेलना, गोदाम तक बन रहे
शिकायतों के अनुसार, करियाटोला क्षेत्र में बिना किसी वैध नक्शे की स्वीकृति और अनुमति के निर्माण कार्य जारी हैं। बताया जा रहा है कि रिहायशी इलाके में न केवल आवास, बल्कि बड़े घर और गोदाम तक बनाए जा रहे हैं। जबकि शासकीय जमीन का आवंटन नियमानुसार केवल जरूरतमंदों को आवास के लिए किया जाता है।
स्थानीय सूत्रों के हवाले से पता चला है कि बड़े व्यापारी और ठेकेदार, नेताओं और अधिकारियों के संरक्षण में इन जमीनों पर लगातार कब्जा कर रहे हैं, उनकी खरीद-बिक्री की जा रही है, और बड़े-बड़े निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर गहरा सवाल
स्थानीय निवासियों का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने अवैध निर्माण को लेकर कई बार प्रशासन और नगर पंचायत से शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों का मानना है कि नेताओं के अदृश्य संरक्षण और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही अवैध निर्माण करने वालों को लगातार बल मिल रहा है।
नगर नियोजन अधिनियम स्पष्ट कहता है कि बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण करना दंडनीय अपराध है। प्रशासन के पास अधिकार है कि वह न सिर्फ ऐसे निर्माणों को गिरा सकता है, बल्कि भारी जुर्माना और आपराधिक मामला भी दर्ज कर सकता है। लेकिन डोंगरगांव प्रशासन की चुप्पी इस पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला रही है।
तहसीलदार का बयान
इस संबंध में तहसीलदार प्यारे लाल नाग से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, “नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। संबंधितों को नोटिस दिया गया है। अवैध निर्माण पर लगातार कार्यवाही की जा रही है और आगे भी कार्यवाही जारी रहेगी।”
हालांकि, तहसीलदार के इस बयान के बावजूद, मौके पर अवैध निर्माण कार्य बेरोकटोक जारी है, जो उनके ‘समयाभाव’ वाले तर्क और कार्यवाही के दावों पर सवाल खड़ा करता है। सवाल यह है कि यदि नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है, तो अवैध निर्माण अब तक गिराया क्यों नहीं गया, और क्या तहसीलदार पर कोई राजनीतिक दबाव है जिसके कारण कार्यवाही टल रही है?



