
डोंगरगांव/राजनांदगांव (1st खबर 24)। राजनांदगांव जिले के जनपद पंचायत डोंगरगांव अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत आसरा की मिट्टी, यहां के विकास और ग्रामीणों के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई की राशियों के उपयोग को लेकर एक बार फिर गंभीर प्रशासनिक व कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं। न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) डोंगरगांव में चल रहे शासकीय राशि की वसूली के मामलों के आधिकारिक आदेश पत्रक (Order Sheet) से यह साफ उजागर होता है कि आसरा पंचायत की पूर्व सरपंच और तत्कालीन सचिव के खिलाफ लाखों रुपये की वसूली का प्रकरण विचाराधीन है।
इसी बीच, सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें आसरा के तत्कालीन सचिव किशन कोलियारे ग्राम पंचायत सांगिनकछार में सचिव का प्रभार लेते नजर आ रहे हैं और शासकीय दफ्तर के भीतर ही गुलाल लगाकर व मेज पर केक सजाकर उनका स्वागत किया जा रहा है। हमारे गांव के विकास कार्यों की राशि में विसंगति के आरोपों और अदालती वारंट के बीच शासकीय कार्यालय के भीतर इस प्रकार प्रभार ग्रहण करने और जश्न की तैयारी की वायरल तस्वीरों ने आसरा के प्रत्येक जागरूक नागरिक को झकझोर कर रख दिया है।
📄 सरकारी और न्यायालयीन फाइलों में दर्ज है यह सच:
”1st खबर 24″ के पास उपलब्ध आधिकारिक विधिक और प्रशासनिक प्रतिवेदनों के अनुसार, यह पूरा मामला पूरी तरह से ऑन-रिकॉर्ड है:
- हमारे गांव के विकास की राशियां: जनपद पंचायत डोंगरगांव के आधिकारिक प्रतिवेदनों के मुताबिक, ग्राम पंचायत आसरा में नाली निर्माण, यादव भवन (विधायक मद), सामुदायिक भवन और सोखदा गड्ढा निर्माण जैसी विभिन्न महत्वपूर्ण मदों की राशियों में कुल ₹6,62,381/- की कथित अनियमितता पाई गई थी। इसके अतिरिक्त एक अन्य पृथक प्रकरण में भी ₹1,64,798/- की वसूली योग्य राशि का निर्धारण किया गया है।
- अदालत द्वारा आहूत करने का वारंट: न्यायालयीन आदेश पत्रक के अनुसार, इस राशि की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करने और अनावेदकों की लगातार अनुपस्थिति के कारण, उन्हें न्यायालय के समक्ष आहूत (तलब) करने हेतु पुलिस अभिरक्षा के माध्यम से लाने का वारंट जारी किया चुका है।
- रिकॉर्ड गायब होने की आधिकारिक पुष्टि: आसरा पंचायत के वर्तमान प्रशासन द्वारा पूर्व में ही राज्य सूचना आयोग को लिखित रूप में सूचित किया जा चुका है कि संबंधित निर्माण कार्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिल, वाउचर और निर्माण फाइलें पंचायत रिकॉर्ड में अनुपलब्ध (गायब) हैं।
❓ आसरा गांव की जनता पूछ रही है तीन सीधे सवाल:
- क्या इसी का नाम सुशासन है?: हमारे गांव आसरा की गलियां आज भी मूलभूत विकास कार्यों, नालियों और सामुदायिक भवनों के निर्माण को तरस रही हैं। हमारे हक के पैसे की रिकवरी लंबित है, तो फिर प्रशासनिक स्तर पर संबंधित को नई पंचायत सांगिनकछार का प्रभार देकर गुलाल उड़ाने और जश्न मनाने की छूट किस नियम के तहत दी गई?
- सबूतों के नष्ट होने की आशंका: जब आधिकारिक तौर पर यह प्रमाणित है कि आसरा पंचायत के कई बिल-वाउचर और फाइलें गायब हैं, तो ऐसे गंभीर प्रकरण के बीचों-बीच सांगिनकछार जैसी पंचायत की कमान सौंपने से क्या जांच और साक्ष्य प्रभावित नहीं होंगे?
- पारदर्शिता पर चोट: क्या राजनांदगांव जिला प्रशासन इस पूरे ढर्रे की निष्पक्ष समीक्षा करेगा, ताकि हमारे गांव के विकास की अटकी हुई एक-एक पाई की शत-प्रतिशत वसूली हो सके?



