
राजनांदगांव-डोंगरगढ़ विकास खंड के अंतिम छोर पर स्थित बागनदी अंतर्राज्यीय वनोपज जांच नाका पर सुरक्षा और निगरानी को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिस जांच नाका को वन विभाग हाईटेक होने का दावा करता है, वहाँ लगाए गए चार सुरक्षा कैमरों में से तीन ख़राब पड़े हैं। यह स्थिति तब है जब यह नाका छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की अंतर्राज्यीय सीमा पर स्थित है, जहाँ से प्रतिदिन हज़ारों मालवाहक और यात्री वाहन गुज़रते हैं।
वनोपज तस्करी का जोखिम
बागनदी नाका वन विभाग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ से तेंदुपत्ता, इमारती लकड़ी, जलाऊ लकड़ी सहित विभिन्न प्रकार के वनोपज की जांच कर उन्हें छत्तीसगढ़ में प्रवेश दिया जाता है। कैमरों के बंद होने से वनोपज की अवैध तस्करी पर प्रभावी निगरानी रखना मुश्किल हो गया है।
प्रभारी ने दी सूचना, कार्रवाई शून्य
अंतर्राज्यीय जांच नाका के प्रभारी ने बताया कि कैमरों के बंद होने की सूचना उच्च कार्यालय को दे दी गई है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक कोई सुधार नहीं हुआ है।
बड़ी दुर्घटना की आशंका
यह क्षेत्र दो राज्यों के बीच परिवहन का मुख्य मार्ग है। लगातार आवागमन और कैमरों की निष्क्रियता के कारण किसी भी प्रकार की बड़ी दुर्घटना या अप्रिय घटना घटने का जोखिम बढ़ गया है। नाके के ठीक बगल में बागनदी थाना भी स्थित है, बावजूद इसके वन विभाग की इस लापरवाही पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस तथाकथित ‘हाईटेक’ जांच नाका की सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए और बंद पड़े कैमरों को तुरंत ठीक कराया जाए।


